इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट
गाय पर निबंध
*गाय :- भारतीय संस्कृति की धरोहर* भारत में गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि माता का स्थान दिया गया है। प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में गाय को पवित्र और पूजनीय माना गया है। इसे "गौमाता" कहा जाता है क्योंकि यह हमें पोषण और जीवन के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करती है। गाय के दूध से बना घी, दही और मक्खन न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी होते हैं। आयुर्वेद में तो गाय के दूध और घी को औषधि के रूप में बताया गया है। इतना ही नहीं, गाय का गोबर और गोमूत्र भी कृषि में और प्राकृतिक उपचारों में अत्यंत उपयोगी हैं। ग्रामीण भारत में गाय खेती-बाड़ी की आत्मा मानी जाती है। किसान के लिए यह न केवल आर्थिक सहारा है, बल्कि उसकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा भी है। प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है, "जहाँ गाय का वास होता है, वहाँ समृद्धि और शांति निवास करती है।" आज के आधुनिक युग में भी गाय का महत्व कम नहीं हुआ है। जैविक खेती, प्राकृतिक खाद और स्वास्थ्यकर जीवनशैली की ओर लौटते समय गाय का योगदान और भी बढ़ जाता है। अतः हमें चाहिए कि हम गायों की रक्षा करें, उनकी देखभाल करें और...
मारवाड़ी हूंकार बात
सब 'कुँवारा' भाई लोगा ने सादर समर्पित । 💘🙇💘"कुँवारा री पीड़"💘🙇💘 दुनिया का सब 'कुँवारा'मिल कर, मीटिंग है बुलवाई । जा कर के 'भगवान' के आगे अर्जी एक लगाई ।। अर्जी एक लगाई, "प्रभु"म्हारी नैया पार लगावो। काई बिगाड्यो थाँ को, म्हाने क्यूँ नहीं परणावो ।। म्हे सुणी हां थारे पास, है सगळा की जोड़ी । म्हारी बारी कद आसी, म्हे कद चढ़ाला घोड़ी ।। कद चढाला घोड़ी, लुगाई म्हाने भी दिलवाओ । दुनिया ताना मारे वां को, मुण्डो बंद करावो ।। इस्यो कांई बुरो कियो जो, म्हे इतनो दुःख पाँवा । रोजीना थाँ के मिन्दर में, हाज़री लगावा ।। हाज़री लगावा , रोज चढ़ावां लाडू पेठा । धारली ढिठाई थे तो, निष्ठुर बन कर बेठा ।। पग पकड़ां 'भगवान्' थारां, अब थाँ को जिद छोड़ो । सगळा काम करा हाथां सु, रोट्यां को भी फोड़ो ।। रोट्यां को भी फोड़ो, पाँती आवे जिसी देदो । नहीं देणे री मन में है तो, साफ़ साफ़ कहदो ।। 'कुँवारा'की बात सुण कर , "भगवन" कर्यो विचार । आ सगळा की किस्मत में, कैयां कोनी 'नार' ।। कैयां कोनी 'नार', देखणा पड़ सी सगळा खाता । इत्ती बड़ी भू...

Super
जवाब देंहटाएं